विरोधियों की ‘फाइलें’ हुईं फेल,जमुई जेडीयू जिलाध्यक्ष पद पर शैलेंद्र महतो की धमाकेदार वापसी
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जमुई ब्यूरो(बिहार)।तमाम सियासी घेराबंदी,अटकलों और ‘पुरानी फाइलों’ के जरिए छवि धूमिल करने की कोशिशों को दरकिनार करते हुए शैलेंद्र कुमार महतो ने एक बार फिर जमुई की राजनीति में अपनी बादशाहत साबित कर दी है।रविवार,1 मार्च को हुए संगठनात्मक चुनाव में कार्यकर्ताओं ने महतो के नेतृत्व पर अटूट विश्वास जताते हुए उन्हें दोबारा जदयू जिलाध्यक्ष निर्वाचित किया।
साजिशों का ‘चक्रव्यूह’ हुआ ध्वस्त
चुनाव से ठीक पहले शैलेंद्र महतो को रोकने के लिए विरोधियों ने बिसात बिछानी शुरू कर दी थी। पुराने मामलों और विवादों को उछालकर एक ‘नेगेटिव नैरेटिव’ तैयार करने की कोशिश की गई ताकि उनकी दावेदारी कमजोर की जा सके।हालांकि, चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया कि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं ने व्यक्तिगत प्रहारों के बजाय अनुभव और सांगठनिक मजबूती को चुना है।
इन 3 कारणों ने दिलाई जीत:
अजेय जमीनी पकड़:
सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में संगठन का विस्तार और कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद शैलेंद्र महतो की सबसे बड़ी ताकत बनी।
सक्रियता का ईनाम:
प्रतिनिधियों का मानना था कि पिछले कार्यकाल के दौरान पार्टी जिला स्तर पर बेहद सक्रिय रही,जिसका लाभ इस चुनाव में मिला।
अनुभव पर भरोसा:
गुटबाजी को दरकिनार कर कार्यकर्ताओं ने संदेश दिया कि वे फिलहाल किसी भी नए प्रयोग के बजाय आजमाए हुए नेतृत्व के साथ चलने को तैयार हैं।
[“यह जीत केवल एक पद की प्राप्ति नहीं है,बल्कि उन ‘प्रायोजित विवादों’ को करारा जवाब है जो चुनाव से ऐन पहले सिर्फ राजनीतिक नुकसान पहुंचाने के लिए खड़े किए गए थे।”
—राजनीतिक विश्लेषक ]
समर्थकों में जश्न का माहौल
नतीजों की घोषणा होते ही समर्थकों ने आतिशबाजी कर और मिठाई बांटकर खुशी का इजहार किया।राजनीतिक गलियारों में इस जीत को विरोधियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।शैलेंद्र महतो के दोबारा कमान संभालने से जिले में जदयू संगठन को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।

