शिक्षा व्यवस्था को ठेंगा:अलीगंज ब्लॉक की निर्वाचन शाखा में 10 वर्षों से ‘अंगद’ की तरह जमे हैं शिक्षक विवेक कुमार
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अलीगंज(जमुई)।एक ओर सरकार शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए शिक्षकों की उपस्थिति और स्कूलों की मॉनिटरिंग पर जोर दे रही है,वहीं दूसरी ओर इस्लामनगर अलीगंज प्रखंड में नियमों को ताक पर रखने का एक बड़ा मामला सामने आया है।उत्क्रमित मध्य विद्यालय के एक शिक्षक विवेक कुमार पिछले लगभग एक दशक(10 वर्ष)से स्कूल छोड़कर प्रखंड कार्यालय की निर्वाचन शाखा में प्रतिनियोजित(Deputed)हैं।
•स्कूल से दूरी,ऑफिस से नजदीकी•
कायदे से शिक्षक का काम बच्चों को भविष्य गढ़ना है,लेकिन विवेक कुमार ने ब्लॉक कार्यालय को ही अपना स्थाई ठिकाना बना लिया है।स्थानीय लोगों और सूत्रों की मानें तो अलीगंज बाजार के मूल निवासी होने के कारण उनकी यहां गहरी पैठ है।चर्चा है कि उक्त शिक्षक की ब्लॉक कार्यालय में अच्छी-खासी ‘धाक’ चलती है,जिसके दम पर वे नियमों को दरकिनार कर एक ही कुर्सी पर वर्षों से जमे हुए हैं।
‘चहेतों’ को सेट करने के माहिर खिलाड़ी!
ब्लॉक गलियारों में यह चर्चा आम है कि विवेक कुमार न केवल खुद वहां जमे हैं,बल्कि अन्य चहेते शिक्षकों को निर्वाचन शाखा में प्रतिनियोजित करवाने में भी ‘माहिर’ माने जाते हैं। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार,किसी भी शिक्षक को इतने लंबे समय तक गैर-शैक्षणिक कार्यों में प्रतिनियोजित रखना संदेहास्पद है।
अधिकारियों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
हैरत की बात यह है कि पिछले 10 सालों में कई अधिकारी आए और गए,लेकिन विवेक कुमार की कुर्सी नहीं हिली।यह स्थिति शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की कार्यशैली और उनकी संलिप्तता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
सवाल यह है कि क्या विभाग के पास शिक्षकों की कमी है जो एक ही व्यक्ति को 10 साल तक प्रतिनियोजन पर रखा गया है?
सवाल यह भी है कि क्या बच्चों की पढ़ाई से ज्यादा जरूरी चुनावी कार्यालय का लिपिकीय कार्य है?
“शिक्षक का मूल कार्य अध्यापन है।यदि कोई शिक्षक दशकों तक कार्यालयों में प्रतिनियोजित रहता है,तो यह सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।प्रशासन को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।” — स्थानीय नागरिक
अब देखना यह है कि खबर सुर्खियों में आने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस ‘अंगद के पैर’ जैसे प्रतिनियोजन को खत्म कर शिक्षक को वापस स्कूल भेजता है या रसूख के आगे नियम बौने ही बने रहेंगे।




